जुलाई 2017

'व्यवसाय परिचालन में तकनीक की निर्णायक भूमिका'

अर्थव्यवस्था और उसके चालक तत्वों, तकनीक एवं उसके तीव्र प्रसार तथा समुदायों के सम्मुख आने वाली चुनौतियों के बारे में टाटा समूह के चेयरमैन एमिरेटस तथा टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री रतन टाटा के उद्गार। क्रिसाबेल नोरोन्हा के साक्षात्कार के संपादित अंश।

भारत एवं व्यापक विश्व की अर्थव्यवस्था की स्थिति को आप किस रूप में देखते हैं जो वर्तमान तथा भविष्य में टाटा कंपनियों को प्रभावित करती हैं?
नरेंद्र मोदी ऐसे नए भारत का नजरिया पेश कर रहे हैं जो भ्रष्टाचार से मुक्त और व्यवसाय करने के लिहाज से अधिक खुला और मुक्त होगा। उन्होंने जो मुहिम हाथ में लिया है मैं उसकी सफलता को लेकर बहुत ही आशान्वित हूं, और हालिया चुनाव में मतदान के रुझान दिखाते हैं कि उनके काम व्यापक जनमानस को आकर्षित कर रहे हैं। मेरा मानना है कि भारत यदि इसी तरह अपने मार्ग पर चलता रहे तो मैजूदा सरकार के नेतृत्व में वह अधिक विकास का साक्षी होगा।

हालिया अतीत में दुनिया के कुछ हिस्से रूढिवाद की ओर बढ़े हैं। क्या यह, जैसा कि बहुत से लोग मानते हैं, आर्थिक अवसरों की कमी, बढ़ती आर्थिक असमानता आदि कारकों की वजह से हुआ है, या फिर कोई अन्य कारण हैं?
मुझे लगता है इसका उत्तर मैं नहीं दे सकती क्योंकि मैं खुद को इसका उत्तर देने योग्य नहीं मानती। मैं बस इतना कहूंगी कि जनसंख्या के कुछ हिस्से हैं, और यह उन विभिन्न देशों के लिए सही है, जिन्हें नजरअंदाज किया गया या फिर महत्वपूर्ण नहीं माना गया। मध्यम आय वाले अमेरिका और यूरोप का एक हिस्सा पिछड़ गया और यहां के लोग मौजूदा या उदीयमान व्यवस्था के साथ अपनी असहमति की आवाज उठाते हैं। नव धनाढ्य लोगों और वंचित लोगों के बीच का असंतुलन भी अस्थिरता एवं तनाव को बढ़ाने में योगदान देता है। दुनिया की अनेक सरकारें ऐसी स्थितियों से निबटने में विफल हैं।

बाजार तथा बाजार की शक्तियों को गरीबों तथा हासिए पर पड़े लोगों की ओर प्रभावी रूप से कैसे मोड़ा जा सकता है? क्या इसकी जरूरत है?
मेरा मानना है यहीं वह स्थान है जहां से संवृद्धि आती है; वहीं पर आप समृद्धि के दिखने की उम्मीद करते हैं। भारत के एक अरब से अधिक जनसंख्या को लीजिए। उपभोगी समुदाय के रूप में हम 30-40 करोड़ लोगों की बात करते हैं। आज, स्मार्टफोन और उसकी व्यापक क्षमताओं के साथ आप 80 करोड़ उपभोक्ताओं को छू पा रहे हैं। इनमें से बहुत से उपभोक्ता अमीर नहीं हैं लेकिन फिर भी कंपनियां उन तक पहुंचती हैं, क्योंकि इससे उनके बाजार को विस्तार मिलता है। केवल कुलीनों की जरूरतें पूरी करने से कोई देश समृद्ध नहीं बन सकता। आपको पिरामिड के आधार के बारे में सोचना होगा और इसे उत्पाद और सेवा विकसित करने होंगे जो गरीबों के लिए हों।

हमेशा से तकनीक के हिमायती व्यक्ति के रूप में आप ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और उन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में क्या सोचती हैं जो बिजनस को तितर-बितर करते हैं? वैश्विक एंटरप्राइजेज को, खास कर टाटा जैसे एंटरप्राइजेज को कैसी अनुक्रिया देनी चाहिए?
मेरा मानना है कि व्यवसाय परिचालन में तकनीक की निर्णायक भूमिका है और यह कोई नई बात नहीं है। हम कई दशकों से सूचना प्रौद्योगिकी और उसके द्वारा लाए जाने वाले ऑटोमेशन को देखा है। दिलचस्प रूप से, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एनालिटिक्स अतीत के सूचना तकनीक टूल्स की जगह ले सकते हैं। जब हम गूगल पर जाते हैं तो इस बारे में अधिक नहीं सोचते, हम प्रश्न पूछते हैं और हमें तुरंत उत्तर मिल जाता है, कभी-कभी तो हमारा प्रश्न खत्म होने से पहले ही। इस किस्म की क्षमता व्यापक हो रही है, मानवीय इनपुट में कमी आ रही है और जॉब प्रभावित हो रहा है। टाटा कंपनियों को इस क्षेत्र में अपना आत्मनिरीक्षण करना होगा।

तकनीक जिस तरह से मानव के स्वभाव और व्यवहार को बदल रहा है क्या आप इसे लेकर चिंतित हैं?
यह अभी कुछ ही समय के लिए हो रहा है, सिवाय विभिन्न प्रकार के कौशलों के सृजन के, अथवा विभिन्न कौशल जिनके लिए मनुष्य की आवश्यकता है। अब हम मानव के परे जा रहे हैं और ऐसी कुशलताएं विकसित कर रहे हैं जो किसी तरह मानवीय चिंतन की प्रतिकृति पेश कर सकता है। निश्चित रूप से, ऑटोमेशन व्यवसाय संचालन का एक बड़ा भाग होगा, यहां तक कि सीमित प्रकार के व्यावसायिक फैसले लेने में भी।

मेरे पास एक सिद्धांत है कि हर चीज की चक्रीय गति है। आप किसी एक तरह से काम करते हैं फिर खुद से सुधार करते हैं। ज्यादातर लोग इसी तरह करते हैं, और यह वस्त्र, ऑटोमोबाइल, आर्किटेक्चर अदि के डिजायन में परिलक्षित होती है। आप परिवर्तन के साथ चलते हैं और फिर जल्द ही फिर से उन्हीं चीजों की आकांक्षा करने लगते हैं जिसे आपने बदला होता है। हमारा मन एक किस्म की विशिष्टता की मांग करता है। मनुष्य हमेशा परिवर्तन की तलाश में रहता है।

टाटा समूह के सतत विकास के संदर्भ में आपकी क्या उम्मीदें और आकांक्षाएं हैं?
सरल शब्दों में कहें तो एक बेहतर कॉरपोरेट सिटिजन बनने की आकांक्षा और समाज तथा अपने परिचालन क्षेत्र के समुदायों की सेवा करने का लक्ष्य कभी नहीं बदलेगा। ये ऐसे आवश्यक तत्त्व हैं जिसकी जरूरत एक अनोखी कंपनी और उसकी विशिष्ट विरासत के निर्माण के लिए होती है।

आम तौर पर उम्मीद यह रही है कि टाटा संस के चेयरमैन पद से सेवानिवृत होने के बाद आपका जीवन थोड़ा भारमुक्त होता, लेकिन आप तो पहले से भी अधिक व्यस्त हो गए हैं। अब आपका समय किन चीजों में व्यतीत होता है?
कुछ समय तो टाटा ट्रस्ट को रूपांतरित करने हेतु अपने सहयोगियों के साथ काम करने में व्यतीत होता है। साथ ही, स्टार्टअप में निवेश करने के लिए मैंने एक छोटी कंपनी शुरू की है, और फिर बाहर से मेरी, बोर्ड की और उन कमीटियों प्रतिबद्धता है जिनका मैं सदस्य हूं। इन सारी बातों ने साथ मिलकर मुझे और अधिक व्यस्त बना रखा है।